Inkhabar Haryana, PPP Scheme: हरियाणा की राजनीति में चर्चा का विषय बनी परिवार पहचान पत्र (PPP) योजना को लेकर हाल ही में आए हाईकोर्ट के फैसले ने प्रदेश के लाखों लोगों को राहत दी है। यह योजना जिसे राज्य सरकार ने विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए अनिवार्य बना दिया था, पिछले 6 सालों से विवाद और आलोचना का केंद्र रही है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाल ने इस योजना के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है।
पीपीपी योजना विवाद और समस्याएं
परिवार पहचान पत्र योजना को प्रदेश सरकार ने नागरिकों की पहचान और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को सरल बनाने के उद्देश्य से शुरू किया था। लेकिन सुरजेवाला ने इसे ‘परिवार परेशानी योजना’ और ‘परमानेंट परेशानी योजना’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह योजना प्रदेश के लोगों के लिए समस्याओं और भ्रष्टाचार का कारण बनी।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि पेयजल कनेक्शन, स्वास्थ्य सुविधाएं, बिजली और अन्य मूलभूत जरूरतों के लिए पीपीपी को अनिवार्य बनाने से प्रदेशवासियों को बेवजह परेशान किया गया। उन्होंने इसे “भ्रष्टाचार का अड्डा” करार देते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनता का शोषण किया और भारी धन लूटा।
हाईकोर्ट का फैसला
हाल ही में, हरियाणा हाईकोर्ट ने इस विवादित योजना पर राज्य सरकार को झटका देते हुए इसे अनिवार्य करने की बाध्यता को हटा दिया। सुरजेवाला ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे प्रदेश की जनता ने राहत की सांस ली है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक सुखद संदेश बताया और कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला सरकार की तानाशाही, उत्पीड़न और लूट पर रोक लगाने में सहायक होगा।
सुरजेवाला की मांग
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री खट्टर और नायब सिंह सैनी से प्रदेश की जनता से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए जनता को महीनों तक लाइनों में खड़ा किया गया और उनकी जरूरतों को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया गया।
उन्होंने भाजपा सरकार पर असली मुद्दों से भटकाने और जनता को फिजूल के झंझटों में उलझाने का आरोप लगाया।