




Protest Demonstration: हरियाणा में जिला पार्षदों ने एकत्रित होकर नगर निगम पार्षदों की तरह कार्य करने की मांग को लेकर एक रोष मार्च निकाला। इस मार्च का नेतृत्व जिला पार्षद संजय बड़वासनी ने किया, जो घोड़ी पर बैठकर सिर पर गठड़ी रखे हुए थे। उनका कहना था कि यह गठड़ी दर्शाती है कि उन पर 18-18 गांवों के विकास का बोझ है। उनका आरोप है कि उन्हें विकास कार्यों के लिए बहुत कम ग्रांट मिलती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सांसद और विधायक की तरह हर पार्षद को साल में एक बार एक करोड़ रुपये का कोटा दिया जाए।
नगर परिषद के पार्षद के पास आज 15,000 वोट हैं, जबकि जिला पार्षद के पास 55 से 60 हजार वोट हैं। इसके बावजूद, उन्हें केवल 40-45 लाख रुपये ही मिलते हैं, जबकि नगर निगम पार्षद प्रति वर्ष 70 से 80 करोड़ रुपये का विकास कार्य करवा रहे हैं। संजय बड़वासनी ने यह भी बताया कि उन्हें भत्ते के मामले में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
नगर निगम पार्षदों को 15 से 20 रुपये का भत्ता मिल रहा है, जबकि जिला पार्षदों को सिर्फ 6,000 रुपये भत्ता मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र सौंपा है और उम्मीद की है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। जिला पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो वे विभिन्न तरीकों से अपना विरोध जारी रखेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य अपने गांवों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाना है। उन्हें न्याय की जरूरत है, ताकि वे भी अपने क्षेत्र में विकास कर सकें।
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