




राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि दलजीत दल्लेवाल के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन पर सरकार से बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि 14 फरवरी को इस मुद्दे पर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बैठक होगी। टिकैत ने कहा कि हम जगजीत सिंह डल्लेवाल के साथ खड़े हैं और चाहते हैं कि बातचीत के जरिए समाधान निकले।” उन्होंने किसानों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए सरकार को चेताया कि अगर समाधान नहीं हुआ तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।
टिकैत ने बड़े व्यापारियों के कर्ज माफ किए जाने और किसानों की अनदेखी पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार केवल बड़े व्यापारियों का कर्ज माफ कर रही है। गांवों और देहातों के छोटे दुकानदार और किसान मजदूरों को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। साप्ताहिक बाजारों को बंद करने की साजिश हो रही है, जिससे किसानों की जमीन कर्ज के बोझ तले दबती जा रही है। जल्द ही देश की 70% जमीन उद्योगपतियों के हाथों में जाने का खतरा है।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान यह स्पष्ट हो चुका था कि सरकार किसानों के हितों के लिए चिंतित नहीं है। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।




