




सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने कहा कि 2021 तक हरियाणा में मुख्य रूप से शराब और बीड़ी-सिगरेट के नशे का चलन था। लेकिन सिंघु बॉर्डर और बहादुरगढ़ बॉर्डर पर किसानों के लंबे समय तक बैठे रहने से नशे के अन्य रूपों में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर बैठे किसानों की वजह से प्रदेश में नशे का विस्तार हुआ है।
सांसद ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसान आंदोलन के दौरान सिंघु और बहादुरगढ़ बॉर्डर के पास लगते गांवों से करीब 700 लड़कियां लापता हो गईं। उन्होंने इस मामले पर चिंता जताई और इसे किसान आंदोलन का अप्रत्यक्ष प्रभाव बताया।
रामचंद्र जांगड़ा ने आंदोलनकारी किसानों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे किसानों की तरह नहीं, बल्कि कसाई की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों पर किसानों ने विरोध के दौरान कई ऐसी घटनाएं कीं, जिनसे कानून-व्यवस्था बिगड़ी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सड़कों पर लोगों की लाशें लटकाई गईं।
जांगड़ा ने किसान नेताओं गुरनाम सिंह चढूनी और राकेश टिकैत पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेता हरियाणा के किसानों को गुमराह कर रहे हैं। जांगड़ा ने कहा कि चुनाव के बाद इन नेताओं की जमानत जब्त हो गई, लेकिन ये अभी भी किसानों को भड़काने का काम कर रहे हैं।
राज्यसभा सांसद का मानना है कि किसान आंदोलन ने हरियाणा की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने इसे प्रदेश की छवि खराब करने वाला बताया और कहा कि आंदोलन ने न केवल किसानों बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी प्रभावित किया।




