




2010 में, नूंह के नौ गांवों—खेड़ली कंकर, मेहरोला, बडेलाकी, कंवरसीका, रोजकामेव, धीरदोका, रूपाहेड़ी, खोड (बहादरी) और रेवासन—की 1600 एकड़ भूमि आईएमटी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके लिए सरकार ने प्रति एकड़ 25 लाख रुपये मुआवजा दिया। बाद में फरीदाबाद के चंदावली और मच्छगर गांवों की भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों को कोर्ट के आदेश पर प्रति एकड़ दो करोड़ रुपये मुआवजा मिला।
इस जानकारी के बाद नूंह के किसानों ने सरकार से समान मुआवजा मांगा। हालांकि, उन्हें केवल 21 लाख रुपये प्रति एकड़ मिले और 25 लाख रुपये प्रति एकड़ देने का वादा किया गया। लेकिन यह वादा आज तक पूरा नहीं हुआ। इसी मुद्दे को लेकर किसान 29 फरवरी 2024 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
धरने के दौरान किसानों ने कई बार महापंचायत आयोजित की, जिसमें भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष रवि आजाद, दिल्ली किसान मोर्चा के अध्यक्ष सत्येंद्र लोचव, और अन्य प्रमुख किसान नेता शामिल हुए। किसानों ने जिला प्रशासन के साथ कई बैठकें कीं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
आईएमटी रोजकामेव से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करते हुए उद्योग मंत्री राव नरबीर ने एसपी नूंह को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धरना हटाने से आईएमटी का काम तेजी से पूरा होगा।




