Inkhabar Haryana, Sawan last Monday: सावन का पावन महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है और आज उसका आखिरी सोमवार है। पूरे देश में खासकर उत्तर भारत में इस दिन का धार्मिक महत्व बेहद खास होता है। श्रद्धालु भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। गाजियाबाद स्थित प्राचीन दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर में आज सुबह से ही आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
अल सुबह से ही लगी भक्तों की लंबी कतारें
भोर होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे – हर उम्र के भक्त हाथों में जल कलश, बेलपत्र, पुष्प और भस्म लेकर मंदिर की ओर बढ़ते नजर आए। मंदिर प्रांगण “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय भोलेनाथ” के जयघोषों से गूंज उठा। भक्तों की लंबी कतारें मंदिर के बाहर से लेकर मुख्य द्वार तक लगी रहीं, लेकिन किसी को भी कोई जल्दबाजी नहीं थी – सब शांत भाव से अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
बारिश में भी नहीं डिगी आस्था
आज सुबह से ही रुक-रुक कर बारिश हो रही थी, लेकिन यह भी भक्तों की आस्था को डिगा नहीं पाई। कई श्रद्धालु छतरियों के नीचे, तो कुछ खुले आसमान के नीचे भीगते हुए भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने की प्रतीक्षा में डटे रहे। शिवभक्तों के चेहरे पर एक अनोखा तेज और संतोष झलक रहा था। बारिश के पानी को शिव की कृपा समझते हुए श्रद्धालु उसमें भीगते हुए ‘जय शिव शंकर’ के नारे लगाते नजर आए।
दूधेश्वर नाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
गाजियाबाद का दूधेश्वर नाथ मठ मंदिर सिर्फ धार्मिक ही नहीं, ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मंदिर हजारों साल पुराना बताया जाता है और मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं विराजमान हैं। सावन के महीने में यहां श्रद्धालुओं का तांता लगना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम सोमवार को यह संख्या हजारों पार कर जाती है।
शिव को ‘भोलेनाथ’ यूं ही नहीं कहा जाता। मान्यता है कि वे बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं चाहे कोई गरीब हो या अमीर, उन्हें सिर्फ सच्चे मन से अर्पित जल और भक्ति ही पर्याप्त है। यही कारण है कि सावन में विशेषकर सोमवार को लाखों भक्त शिवालयों की ओर खिंचे चले आते हैं।
व्यवस्था में जुटा प्रशासन और मंदिर समिति
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं। जलाभिषेक की कई पंक्तियां बनाई गईं, ताकि भीड़ को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सके। साथ ही सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के इंतजाम भी किए गए। पुलिस, होमगार्ड और स्वयंसेवकों की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ व्यवस्थाओं में लगी रही।