Inkhabar Haryana, Sawan Mahashivratri 2025: हरियाणा के फरीदाबाद में आज महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह होते ही शहर के प्रमुख शिवालयों में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। शिवभक्तों ने पूरे भक्ति भाव से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और सुख-शांति, समृद्धि की कामनाएं कीं। मंदिरों की घंटियों की गूंज, ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे और भक्तों की श्रद्धा ने माहौल को पूरी तरह शिवमय बना दिया।
भोर होते ही मंदिरों की ओर उमड़ी भीड़
सुबह करीब 5:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का मंदिरों की ओर आना शुरू हो गया था। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवक सभी ने भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की। भक्तों ने शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, बेलपत्र, भांग और धतूरा चढ़ाया। कुछ लोगों ने उपवास रखकर पूरे विधि-विधान से पूजा की और मंत्रोच्चारण के साथ रुद्राभिषेक किया।
कांवड़ लेकर लौटे श्रद्धालु भी हुए शामिल
हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल लेकर लौटे कांवड़िए भी मंदिरों में पहुंचे। उन्होंने शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। उनके चेहरों पर भक्ति की अद्भुत चमक साफ नजर आ रही थी। मंदिरों के प्रांगण में कांवड़ियों की टोली ने ‘बोल बम’ और ‘हर-हर शंभू’ के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान कर दिया।
पुजारियों ने बताया पूजा का शुभ मुहूर्त
स्थानीय मंदिर के पुजारी कपिल भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जलाभिषेक का शुभ समय सुबह 3:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक होता है। इसी दौरान रुद्राभिषेक, अभिषेक व विशेष पूजन का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, और भोलेनाथ तो इतने दयालु हैं कि बिना मांगे ही अपने भक्तों पर कृपा बरसा देते हैं।
सावन और शिव विवाह का पौराणिक महत्व
पुजारी भारद्वाज ने यह भी बताया कि सावन का महीना शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी माह भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था। इस कारण इस महीने में की गई पूजा का पुण्य कई गुना अधिक माना जाता है। इसी भाव से भक्त पूरे सावन भर विशेष भक्ति करते हैं।
फरीदाबाद के श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, शिव शक्ति धाम, पंचमुखी शिव मंदिर, और भलेश्वर धाम सहित तमाम मंदिरों में आज भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और शिव पुराण पाठ भी हुए। महिलाएं मंगल कामनाओं के साथ पूजा में लीन रहीं, वहीं युवा भक्तों ने स्वेच्छा से मंदिरों में सेवा दी।