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Sawan Mahashivratri 2025: हरियाणा के पुजारी ने बताया कांवड़ परंपरा का क्या है असली महत्व?

BY: • LAST UPDATED : July 23, 2025
Inkhabar Haryana, Sawan Mahashivratri 2025: सावन मास की महाशिवरात्रि पर मंगलवार को यमुनानगर के मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के प्रमुख शिवालयों में अलसुबह से ही भक्तों का तांता लग गया। हर तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने पूरे विधि-विधान से शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, फूल, फल, और दूध अर्पित कर पूजा अर्चना की। कांवड़ियों का उत्साह देखते ही बनता था, जिन्होंने हरिद्वार से लाया गया पवित्र गंगाजल अपने आराध्य शिव पर अर्पण कर परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की।

रावण ने की थी कांवड़ परंपरा की शुरुआत

सरोजिनी कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर के पुजारी केशव शर्मा ने बताया कि कांवड़ लाने की परंपरा की शुरुआत रावण ने की थी। रावण एक महान शिवभक्त था, जिसने कैलाश यात्रा के दौरान गंगाजल लाकर शिवलिंग पर चढ़ाया था। उसी परंपरा को आज भी कांवड़िए निभा रहे हैं। पुजारी ने बताया कि महाशिवरात्रि और सावन मास में गंगाजल चढ़ाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं और सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

मंदिरों में दिनभर रही भक्तों की भीड़

महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर यमुनानगर के सभी प्रमुख शिवालयों में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। शहर के हनुमान मंदिर, पंचमुखी शिव मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, और अन्य मंदिरों में हजारों श्रद्धालु जुटे। कुछ श्रद्धालु तो रातभर जागरण कर शिव की आराधना में लीन रहे, जबकि अन्य ने अलसुबह से ही जलाभिषेक के साथ पूजा अर्चना आरंभ कर दी।

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