Inkhabar Haryana, Shruti Choudhary on Flood management in Haryana: हरियाणा में लगातार हो रही भारी बारिश और जलभराव की स्थितियों के बीच राज्य सरकार सक्रियता से फ्लड मैनेजमेंट की दिशा में कदम उठा रही है। भिवानी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरियाणा की सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण बैठकों के माध्यम से बाढ़ प्रबंधन के ठोस निर्णय लिए जा चुके हैं।
टांगरी नदी के जलस्तर पर रखा गया नियंत्रण
मंत्री श्रुति चौधरी ने जानकारी दी कि हाल ही में अत्यधिक वर्षा के कारण टांगरी नदी का जलस्तर सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गया था। इसके बावजूद सिंचाई विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के समन्वित प्रयासों से जल स्तर को नियंत्रित रखा गया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव जैसी आपात स्थितियों से बचाव किया गया। यह दर्शाता है कि राज्य सरकार की तैयारियां और मैदानी स्तर पर कार्यवाही समय पर और प्रभावी रही।
तोशाम क्षेत्र में जलभराव का किया निरीक्षण
भिवानी जिले के अंतर्गत आने वाले तोशाम विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति का जायजा लेने के लिए सिंचाई मंत्री ने अधिकारियों के साथ मौके पर दौरा किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल निकासी और राहत कार्यों की समीक्षा की और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि विभागीय टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
SYL नहर मुद्दे पर दिया बयान
सिंचाई मंत्री ने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक अंतर्राज्यीय विषय है और इसका समाधान राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर तलाशा जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय जल मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई है, जिसमें इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया। मंत्री ने बताया कि यह मामला लंबे समय तक सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन रहा है और अब समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं।
बेहतर मानसून और सरकार की तत्परता
श्रुति चौधरी ने यह भी बताया कि इस बार मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा है, जिससे अनेक क्षेत्रों में पानी भर गया है। हालांकि, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन सक्रिय रूप से इस स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं। जलभराव की समस्या को न्यूनतम करने और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है।