




पवन कुमार ने 2018 में “पक्षी विहार प्रेरणा केंद्र” की स्थापना की। इस केंद्र में घायल पक्षियों के लिए चिकित्सा और आवास की व्यवस्था की गई है। यहां न केवल घायल पक्षियों का इलाज किया जाता है, बल्कि उनके लिए भोजन और पानी की भी व्यवस्था है। यह केंद्र आजाद परिंदों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुका है। पवन कुमार का कहना है कि घायल पक्षियों को देखकर उन्हें यह महसूस हुआ कि उनके लिए एक स्थायी चिकित्सा केंद्र की आवश्यकता है।
पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल होने वाले मांझे के कारण कई पक्षी घायल हो जाते हैं। पवन कुमार बताते हैं कि बाज, चील, और मोर जैसे पक्षी अक्सर मांझे से गंभीर रूप से घायल होकर यहां लाए जाते हैं। इनमें से कुछ पक्षियों की हड्डियां टूट चुकी होती हैं, तो कुछ उड़ने में अक्षम हो जाते हैं। पवन ने अब तक 700 से अधिक पक्षियों का इलाज किया है। इनमें से 50 से अधिक बाज और 200 से अधिक राष्ट्रीय पक्षी मोर को ठीक कर खुले आसमान में छोड़ा जा चुका है।
पक्षी विहार में विभिन्न प्रजातियों के लिए अलग-अलग आशियाने बनाए गए हैं। उल्लू के लिए दिन में अंधेरे जैसी व्यवस्था की गई है, ताकि वे आराम से रह सकें। कुछ पक्षी जो ठीक होने के बाद भी यहां से नहीं जाते, उन्होंने इसे स्थायी निवास बना लिया है। दाना-पानी के लिए एक विशेष स्थान तय किया गया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों पक्षी भोजन करते हैं।
पवन कुमार ने विलुप्त होती गौरैया को बचाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। अपने खर्चे पर उन्होंने 20,000 लकड़ी के घोंसले बनाकर लोगों में वितरित किए हैं। इन घोंसलों को उन स्थानों पर लगाया गया है, जहां पक्षियों की संख्या अधिक है। पवन कुमार का मानना है कि पेड़ों की कटाई और शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास खत्म हो रहे हैं।
पवन कुमार ने पक्षियों के विलुप्त होने के पीछे शहरीकरण, गगनचुंबी इमारतों, बिजली के तारों का जाल, और पेड़ों की कमी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि घरों में प्लास्टर के कारण गौरैया जैसे पक्षियों को घोंसले बनाने के लिए जगह नहीं मिलती। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पक्षियों के लिए घोंसले लगाने की अपील की।
पवन कुमार ने 2014 में “ट्री मैन” देवेंद्र सूरा के साथ मिलकर पुलिस लाइन में 3,000 पेड़ लगाए। इन पेड़ों की वजह से पुलिस लाइन में पक्षियों का वास बढ़ा है। उन्होंने अपनी ड्यूटी खत्म करने के बाद भी घायल पक्षियों की सेवा और उनके लिए दाने-पानी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है।




