




Stubble Burning: इस साल हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में काफी कमी आई है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पराली जलाने की घटनाओं में 60 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक बदलाव किसानों के प्रति राज्य सरकार की जागरूकता और प्रयासों का परिणाम है।
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने किसानों को पराली न जलाने के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं। ग्राम, खंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया के जरिए भी जानकारी दी जा रही है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए विशेष कृषि यंत्र भी सब्सिडी पर उपलब्ध कराए गए हैं।
हरियाणा सरकार पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी नजर रखे हुए है। इसके लिए ग्राम स्तरीय, खंड स्तरीय और जिला स्तरीय टीमों का गठन किया गया है। अगर फिर भी कोई किसान पराली जलाता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना, एफआईआर और मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी। इससे प्रभावित किसान दो सीज़न तक अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
इस साल अब तक 799 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 432 किसानों की रेड एंट्री की गई है। कैथल जिला सबसे अधिक मामलों के साथ शीर्ष पर है, जबकि अन्य जिलों में भी पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पराली जलाने की घटनाओं को और कम किया जाए ताकि वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके।
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