




Stubble Management: हरियाणा के फतेहाबाद जिले के नाढोड़ी गांव के प्रगतिशील किसान हरि सिंह गोदारा पिछले सात साल से पराली प्रबंधन पर काम कर रहे हैं। वे 28 एकड़ में धान की खेती करते हैं और पराली को कभी आग नहीं लगाते। हरि सिंह ने पराली की गांठें बनाकर बायोएनर्जी प्लांट को 200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचने की शुरुआत की।
उन्होंने अपने गांव के अन्य किसानों को भी पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक किया। उनकी मेहनत का परिणाम है कि अब नाढोड़ी के 85 प्रतिशत किसान धान के अवशेषों में आग नहीं लगाते। पहले किसान 1121 किस्म की धान की पैदावार लेते थे, जिससे पराली का सही प्रबंधन होता था। लेकिन 2014-15 के बाद से परमल और मुच्छल किस्म की धानें उगाई जाने लगीं, जिनकी पराली को चारे के रूप में कम उपयोग किया जाने लगा। इसके चलते कई किसान पराली जलाने लगे।
हरि सिंह ने 2017 में पराली न जलाने की मुहिम शुरू की। उन्होंने पंजाब में पराली से बिजली बनाने वाले प्लांट से मशीनें लाने की कोशिश की, लेकिन दूरी के कारण यह संभव नहीं हुआ। फिर, केंद्र सरकार ने बेलर मशीन पर सब्सिडी दी, जिससे उन्होंने पराली की गांठें बनाना शुरू किया। अब नाढोड़ी में कई किसान जैसे सतपाल धारनिया और देवा धारनिया भी पराली को आग से बचाते हैं। उनके पास दस से ज्यादा मशीनें हैं, जिससे वे पराली का सही प्रबंधन कर रहे हैं। इस तरह, हरि सिंह गोदारा न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणा बन गए हैं।




