




Inkhabar Haryana, Stuble Burning in Haryana: हरियाणा में प्रदूषण के कारण लोगों की परेशानियां बढ़ रही हैं। खासकर जीटी रोड बेल्ट के पानीपत, करनाल और कुरूक्षेत्र में पराली जलाने, निर्माण कार्य और औद्योगिक प्रदूषण की घटनाओं के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। अकेले कुरूक्षेत्र, करनाल और पानीपत में 198 जगहों पर पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जबकि पूरे हरियाणा में ऐसे मामलों की संख्या 680 है। हम कुछ पहलुओं पर बात करेगें, जिससे हरियाणा में प्रदूषण की समस्या को कम करने और पराली के उचित प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
पराली उत्पादन: हरियाणा में प्रति वर्ष 24.33 लाख टन पराली उत्पन्न होती है।
धान का रकबा: प्रदेश में धान की फसल का रकबा 38.32 लाख एकड़ है।
बेलरवाल मशीनें: लगभग 3000 बेलरवाल मशीनें प्रदेश में काम कर रही हैं।
पराली प्रबंधन: केवल 20% पराली का ही उचित प्रबंधन हो रहा है।
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पराली के उपयोग की बात करे तो हम इसका काफी तरीके से उपयोग कर सकते है।
भूसा बनाना: गेहूं और मक्का के फसल अवशेषों को चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
मशरूम की खेती: धान के अवशेषों का उपयोग मशरूम की खेती में किया जा सकता है।
जुताई और बायोकर: रोटावेटर से जुताई करके अवशेष मिट्टी में मिलाए जा सकते हैं।
कंपोस्ट बनाना: अवशेषों का उपयोग कंपोस्ट बनाने में किया जा सकता है।
2G इथेनॉल संयंत्र: पानीपत रिफाइनरी में 100 किलोलीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला संयंत्र स्थापित किया गया है।
बायोमास बिजली परियोजनाएं: कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और फतेहाबाद में चार बायोमास परियोजनाएँ स्थापित की जा रही हैं।
प्रोत्साहन राशि: सरकार प्रति एकड़ 1000/- रुपए की प्रोत्साहन राशि देती है।
कृषि यंत्रों पर अनुदान: 50% अनुदान कृषि यंत्रों पर प्रदान किया जा रहा है।
पराली प्रबंधन पर लाभ: किसानों को पराली प्रबंधन पर 10000/- रुपए प्रति एकड़ का लाभ मिलता है।
अनुदान के लिए आवेदन: 800,000 किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए अनुदान राशि के लिए आवेदन किया है।
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