Inkhabar Haryana, SurajKund Mela 2025: फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अद्भुत प्रदर्शन का मंच है। इस दौरान 7 फरवरी से 23 फरवरी तक चलने वाले इस मेले का शुभारंभ केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सूरजकुंड मेला न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर देश की कला और परंपराओं का प्रचार-प्रसार करने का भी एक महत्वपूर्ण मंच है।
भारतीय संस्कृति का वैश्विक मंच
गजेंद्र शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेला भारत की एकता और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। इस बार मेले में विभिन्न राज्यों के कलाकारों के साथ-साथ कई विदेशी कलाकार भी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे भारत और अन्य देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने CM नायब सैनी, मध्य प्रदेश और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के आयोजनों से भारत का सांस्कृतिक और पर्यटन क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा को प्रदर्शित करने वाला उत्सव है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन क्षेत्र में विकास
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत अंग्रेजों के आने से पहले कभी एक राष्ट्र के रूप में नहीं था, बल्कि यह विभिन्न छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। लेकिन हमारी कला, परंपराएं और संस्कृति हमेशा हमें जोड़ने का कार्य करती रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और परंपराएं अब वैश्विक मंच पर अधिक पहचान बना रही हैं। कोविड-19 के बाद भारत ने जिस तरह से पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों में उन्नति की है, वह दर्शाता है कि भारत विश्व पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।
पर्यटन और पर्यावरण में भारत की बढ़ती भूमिका
गजेंद्र शेखावत ने कहा कि भारत अब केवल सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी विश्व का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है, जिससे अधिक से अधिक विदेशी पर्यटक भारत की संस्कृति से परिचित हो सकें।
उन्होंने कहा कि भारत अपने समृद्ध शिल्प और सांस्कृतिक धरोहर के माध्यम से एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। सूरजकुंड मेला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां देश-विदेश के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं।