Inkhabar Haryana, US Illegal Immigrants Row: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के इस्माईलाबाद कस्बे के रोबिन हांडा का सपना था कि वह अमेरिका जाकर एक बेहतर जीवन जिए और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करे। लेकिन यह सपना न केवल चकनाचूर हुआ, बल्कि इसके साथ ही परिवार को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिका जाने की इस यात्रा में न केवल रोबिन को अत्यधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उसने कई बार मौत को भी करीब से देखा।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 18 वर्षीय रोबिन हांडा ने पिछले साल 12वीं कक्षा पास की थी। इसके बाद उसने अमेरिका जाने का फैसला किया और इस यात्रा के लिए एजेंट को 45 लाख रुपये दिए। यह रकम जुटाने के लिए परिवार ने पुश्तैनी जमीन तक बेच दी। एजेंट ने वादा किया था कि एक महीने के भीतर वह अमेरिका पहुंच जाएगा, लेकिन हकीकत में यह सफर सात महीने लंबा और बेहद कष्टदायक साबित हुआ।
22 जुलाई 2023 को रोबिन ने दिल्ली से मुंबई के लिए उड़ान भरी, जिसके बाद उसे गुयाना, ब्राजील, पेरू और इक्वाडोर भेजा गया। इस यात्रा के दौरान उसे जंगलों और समुद्र के रास्ते से गुजरना पड़ा। यह पूरी प्रक्रिया कुख्यात “डोंकी रूट” के जरिए हुई, जो अवैध आप्रवासन का एक खतरनाक मार्ग माना जाता है। इस दौरान रोबिन और अन्य यात्रियों को असहनीय यातनाएं दी गईं।
भूख, करंट के झटके और मौत का साया
रोबिन ने बताया कि इस दौरान उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया और करंट के झटके तक दिए गए। उसे और उसके साथियों को प्रताड़ित किया गया और परिवार से और अधिक पैसे मंगवाने के लिए मजबूर किया गया। रोबिन ने डोंकी रूट के जंगलों में कई ऐसे शव देखे जो सड़ चुके थे। ये वे लोग थे, जिन्होंने अमेरिका जाने का सपना देखा था, लेकिन वह सपना उनकी मौत के साथ ही खत्म हो गया।
अमेरिका में प्रवेश और डिपोर्टेशन
अत्यधिक कष्ट सहने के बाद रोबिन अमेरिका पहुंचा, लेकिन वहां उसे शरण नहीं दी गई। अमेरिकी अधिकारियों ने उसे अवैध आप्रवासी करार दिया और 104 अन्य भारतीयों के साथ उसे वापस भारत भेज दिया। इन 104 लोगों में से 33 हरियाणा के थे, जिनमें से कई करनाल और कुरुक्षेत्र के थे।
परिवार की हालत और भविष्य की चिंताएं