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Waterlogging Problem in Haryana: हरियाणा के इस जिले में लोगों को जलभराव की समस्या का करना पड़ रहा सामना, नगर परिषद पर लगे गंभीर आरोप

BY: • LAST UPDATED : May 12, 2025
Inkhabar Haryana, Waterlogging Problem in Haryana: हरियाणा के होडल शहर में जलभराव की समस्या वर्षों से लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रही है। नगर परिषद द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए बोरवेल और नालियों के बावजूद हालात जस के तस हैं। हाल ही में शहर में हुए जलभराव ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है और स्थानीय नागरिकों का आक्रोश एक बार फिर सामने आया है।

जल निकासी के नाम पर बोरवेल

स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर परिषद द्वारा गांधी चौक, रामलीला मैदान, राजीव चौक, अग्रसेन चौक, बस स्टैंड, पंचायत कार्यालय और हनुमान मंदिर जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जलभराव से निपटने के लिए बोरवेल खुदवाए गए थे। बताया जा रहा है कि हर बोरवेल पर 3 से 4 लाख रुपये खर्च हुए और कुल मिलाकर 40 से 50 लाख रुपये की लागत आई। लेकिन इन बोरवेलों से न तो जल निकासी संभव हो सकी, न ही लोगों को कोई राहत मिली।

नालियों के निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप

अब नगर परिषद करोड़ों रुपये की लागत से नई नालियों का निर्माण करवा रही है, परंतु इनका उद्देश्य भी जनता की नजरों में संदेहास्पद हो गया है। नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नालियों के निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और कई बार इसकी शिकायत उपमंडल अधिकारी से लेकर जिला उपायुक्त तक की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई जांच या कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि शहर की नालियों और सड़कों को मकानों और दुकानों के स्तर से कई फीट ऊपर बना दिया गया है, जिससे उनके घर व दुकानें नीचे पड़ गई हैं और जलभराव का खतरा और बढ़ गया है। जबकि हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं कि सड़कों और नालियों का स्तर निजी संपत्तियों से ऊपर नहीं होना चाहिए। नगर परिषद द्वारा इन निर्देशों की खुली अवहेलना की जा रही है।

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व्यापारियों की दुकानदारी पर संकट

शहर के दुकानदारों का कहना है कि जलभराव की वजह से उनकी दुकानदारी बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्राहक नहीं आ पा रहे, और दुकान के भीतर तक पानी घुस आता है। नगर परिषद पर सीधा आरोप लगाया जा रहा है कि वह सिर्फ सरकारी पैसों का दुरुपयोग कर रही है, जबकि जमीन पर कोई वास्तविक समाधान नहीं दिखता। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि वर्षों से उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं कभी शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने की बात होती है, तो कभी जल निकासी के इंतज़ामों की योजनाएं सुनाई जाती हैं। लेकिन हर बार चुनावों से पहले ये वादे दोहराए जाते हैं और उसके बाद भुला दिए जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने अपनी उम्र इसी इंतजार में निकाल दी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।