




कैथल डिपो को 10 साल बाद बीएस-6 तकनीक की 96 बसें मिली थीं, जिनमें से 48 को NCR जिलों में भेजा गया है। इसके बदले में बीएस-3 और बीएस-4 तकनीक की मात्र 48 बसें दी गई हैं, जिनकी हालत बेहद जर्जर है। इनमें कई बसों के टायर खराब हैं, सीटें टूटी हैं और गियर बॉक्स सही से काम नहीं कर रहे। इन बसों में सफर करना यात्रियों के लिए असुरक्षित है। इससे कैथल डिपो की बसों की संख्या घटकर सिर्फ 48 बीएस-6 बसों तक सिमट गई है।
कैथल में बसों की कमी का सीधा असर कुरुक्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव पर भी पड़ेगा। इस मेले के लिए बड़ी संख्या में बसों की ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन मौजूदा हालात में बसों की कमी से पर्यटकों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
रोडवेज यूनियन ने इस फैसले को यात्रियों के साथ खिलवाड़ बताया है। यूनियन नेता कृष्ण किच्छाना और बलवान कुंडू ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी। उन्होंने मांग की कि या तो बीएस-6 बसों को वापस लाया जाए या नई बसें दी जाएं।




