




रामबाई की बेटी शर्मिला गहलावत, जो खुद खेलों में 200 से अधिक पदक जीत चुकी हैं, आज डीटीसी बस चालक के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से समाज की कई रूढ़ियों को तोड़ा है। उनकी बेटी जेनिथ ने उनकी राह पर चलते हुए एक और ऊंची उड़ान भरने की तैयारी की है।
जेनिथ फिलहाल हवाई जहाज उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। अब तक उन्होंने 138 घंटे का उड़ान अनुभव हासिल कर लिया है। 200 घंटे की अनिवार्य उड़ान पूरी करने के बाद, वह बतौर पायलट या इंस्ट्रक्टर किसी एयरलाइन में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हो जाएंगी।
जेनिथ की मां शर्मिला खेलों की दुनिया में एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते हैं। उनकी प्रेरणा से ही रामबाई ने 104 वर्ष की उम्र में खेल में कदम रखा और तीन साल में 100 से अधिक पदक जीते। यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों की मेहनत, लगन और समर्पण की है।
जेनिथ ने राजस्थान के वनस्थली विश्वविद्यालय से बीएससी साइंस की डिग्री प्राप्त की है। वह फिलहाल दूरदर्शन निदेशालय से एमबीए कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने सपनों की उड़ान के लिए हवाई जहाज उड़ाने का प्रशिक्षण भी शुरू किया। जेनिथ का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वह पायलट या इंस्ट्रक्टर के रूप में अपने करियर को आकार देंगी।




