समारोह की शुरुआत और पर्यावरण चेतना का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत जूट के थैलों के वितरण से हुई, जो कि सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प के रूप में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वितरित किए गए। यह एक प्रतीकात्मक संदेश था कि समाज को प्लास्टिक की बजाय प्रकृति के अनुकूल विकल्प अपनाने चाहिए। सीएम सैनी ने इस अवसर पर संबोधन करते हुए कहा कि चरखी दादरी न केवल ऐतिहासिक शहर है, बल्कि आज यह पर्यावरण के प्रति हमारी जागरूकता और ज़िम्मेदारी का भी प्रतीक बन गया है। मुझे गर्व है कि हम सब मिलकर आज एक हरित भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
‘एक पेड़ के नाम’ अभियान का उल्लेख
सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘एक पेड़ के नाम’ अभियान का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जैसे हम अपनी जन्म देने वाली मां का सम्मान करते हैं, वैसे ही हमें धरती माता और पर्यावरण का भी आदर करना चाहिए। हमारी धरती माँ भी हमारे जीवन का पोषण करती है, उसे सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने अपील की कि हर नागरिक को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल करनी चाहिए। संयोगवश आज गंगा दशहरा का पर्व भी है, जिसे भारतीय संस्कृति में पवित्र माना जाता है। सीएम सैनी ने इसे विशेष अवसर बताते हुए कहा कि आज ही के दिन माँ गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। यह दिन हमें शुद्धता और जल संरक्षण की प्रेरणा देता है।
प्लास्टिक प्रदूषण और जनस्वास्थ्य पर चेतावनी
मुख्यमंत्री ने पॉलीथीन और सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब पॉलीथीन जलती है, तो उसमें से निकलने वाला धुआं न केवल वायु को दूषित करता है, बल्कि उसके कीटाणु जल के माध्यम से हमारे शरीर में पहुंच कर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। कार्यक्रम में पर्यावरण हितैषी एक और पहल के तहत मुख्यमंत्री ने पांच इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि ये बसें “धुआं रहित” हैं और भविष्य की ओर बढ़ता हुआ कदम हैं। यह कदम हरियाणा को प्रदूषण रहित सार्वजनिक परिवहन की दिशा में ले जाएगा।