




इस हृदयविदारक घटना के बाद पंचायती अखाड़ा निरंजनी के महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी भावुक हो गए और फूट-फूटकर रो पड़े। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने पहले ही सरकार से महाकुंभ की सुरक्षा को सेना के हवाले करने की मांग की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी भीड़ को पुलिस के वश में संभालना संभव नहीं था। हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि महाकुंभ का प्रबंधन सेना को सौंप देना चाहिए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। आज के हादसे में किसी ने अपना पिता खो दिया तो किसी ने अपने प्रियजन को।
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम 6 बजे तक 4.64 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर लिया था, जो कि एक नया रिकॉर्ड था। लेकिन अचानक हुई भगदड़ ने इस भव्य आयोजन को एक त्रासदी में बदल दिया।
इस हादसे ने महाकुंभ मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी ने प्रशासन की नाकामी को लेकर कहा कि अगर कुंभ का प्रबंधन सेना के हाथों में होता तो शायद यह हादसा नहीं होता। मुझे इस त्रासदी से गहरा दुख हुआ है। महाकुंभ जैसे भव्य आयोजन की सुरक्षा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। अभी भी समय है कि सरकार इस मेले की सुरक्षा को सेना के हवाले कर दे।




