




मकर संक्रांति के दिन महाकुंभ का पहला अमृत स्नान परंपरागत रीति-रिवाजों और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और शंभू पंचायती अटल अखाड़े ने सुबह 5:15 बजे अपने शिविरों से निकलकर संगम तट की ओर प्रस्थान किया। यह पवित्र स्नान सुबह 6:15 बजे शुरू हुआ और लगभग 40 मिनट तक चला। स्नान के बाद दोनों अखाड़े 6:55 बजे अपने शिविरों में लौट गए।
महाकुंभ के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। महाकुंभ मेले के डीआईजी वैभव कृष्ण ने बताया कि अमृत स्नान की प्रक्रिया को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए नौ पुलिस टीमें तैनात की गईं। संगम क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटा गया—एक में अखाड़ों को स्नान की सुविधा दी गई, जबकि दूसरे हिस्से में आम श्रद्धालुओं ने स्नान किया। पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) ने दोनों क्षेत्रों के बीच सुरक्षा का जिम्मा संभाला।
महाकुंभ के पहले दिन मकर संक्रांति पर संगम तट पर श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ा। अनुमानित 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर अपनी आस्था का प्रदर्शन किया। सनातन धर्म के 13 अखाड़ों ने निर्धारित क्रम में संगम पर स्नान किया। महंत आचार्य देवेंद्र सिंह शास्त्री ने बताया कि स्नान का शेड्यूल पहले से तय था, और सभी अखाड़ों को समय पर जानकारी दी गई थी।




