




Inkhabar Haryana, one nation one election: भारत में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कानून को लेकर चर्चा तेज है। भिवानी के सांसद धर्मवीर सिंह ने इसे समय की जरूरत बताते हुए कहा कि यह देश के विकास और शासन में स्थिरता लाने के लिए आवश्यक है। उनका मानना है कि आम जनता भी नहीं चाहती कि बार-बार चुनाव हों, क्योंकि इससे न केवल समय और धन की बर्बादी होती है, बल्कि आचार संहिता लगने से विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं।
सांसद धर्मवीर सिंह का कहना है कि बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लगती है, जिससे विकास कार्य रुक जाते हैं और जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब देश आजाद हुआ था, तब भी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते थे। पिछले 40 वर्षों से सभी सरकारें इस पर गंभीरता से विचार कर रही थीं, लेकिन इसे लागू करने में बाधाएं आईं।
धर्मवीर सिंह ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि उनके सांसद भी ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के पक्षधर हैं, लेकिन राजनीतिक मजबूरियों के चलते वे इसका विरोध करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अब अच्छे कामों का भी विरोध करता है। उनके मुताबिक, जब विपक्ष सत्ता में था, तब वह भी एक साथ चुनाव चाहता था, लेकिन अब केवल विरोध करना ही विपक्ष का उद्देश्य रह गया है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए धर्मवीर सिंह ने कहा कि यह पार्टी अब क्षेत्रीय दल बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह समझना चाहिए कि अलग-अलग चुनावों से देश को भारी नुकसान होता है और पूरा देश चाहता है कि चुनाव एक साथ हों।
सांसद धर्मवीर सिंह ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव परिणामों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब वे अपने क्षेत्र में गए, तो जनता ने स्वीकार किया कि लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को कमजोर करना उनकी गलती थी। लोगों को अब एहसास हो गया है कि अगर नरेंद्र मोदी कमजोर होंगे, तो देश कमजोर पड़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिस तेजी से भारत विकास की राह पर अग्रसर था, उसे देखकर जनता ने विधानसभा चुनावों में इस गलती को सुधारने का फैसला किया। हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजे बताते हैं कि लोगों ने बीजेपी के पक्ष में वोट देकर यह साबित कर दिया कि वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही देश को आगे बढ़ता देखना चाहते हैं।
सांसद धर्मवीर सिंह ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कानून लागू करना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सरल बनाएगा, बल्कि देश के विकास को भी गति देगा। जनता को भी इस बात का एहसास है कि बार-बार चुनाव देश के हित में नहीं हैं।




