




हरियाणा की झांकी की शुरुआत महाभारत काल के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृश्य से होगी। इसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में गीता का उपदेश देते हुए दिखाया जाएगा। यह दृश्य भारतीय दर्शन और हरियाणा की सांस्कृतिक जड़ों का प्रतीक है। इसके पीछे एक पारंपरिक हरियाणवी बैलगाड़ी नजर आएगी, जिसमें प्रदेश के समृद्ध शिल्प को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें चमड़े की जूतियां, सरकंडा शिल्प, फुलकारी, चोप, बाग, पंजा दरी, रेवाड़ी के पीतल के बर्तन, सुराही और मिट्टी के बर्तन जैसे अद्भुत कारीगरी के नमूने शामिल होंगे। यह भाग हरियाणा के पारंपरिक जीवन और शिल्पकारों की कला को जीवंत करेगा।
झांकी का मध्य भाग हरियाणा के तकनीकी और डिजिटल विकास का प्रतीक होगा। इसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति को लैपटॉप पर काम करते हुए दिखाया जाएगा, जो राज्य की तकनीकी साक्षरता और डिजिटल प्रगति को दर्शाता है। उनके पास एक बच्चा भी नजर आएगा, जो युवा पीढ़ी की नई तकनीकों में रुचि और आधुनिक शिक्षा प्रणाली का प्रतिनिधित्व करेगा। इस भाग के जरिए हरियाणा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में तकनीकी पहुंच के विस्तार और समाज पर इसके प्रभाव को रेखांकित किया जाएगा।
झांकी के अंतिम हिस्से में हरियाणा के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। गुरुग्राम की ऊंची-ऊंची इमारतों के बीच पांच खिलाड़ी लाइव नजर आएंगे, जिन्होंने पैरालंपिक में मेडल जीतकर हरियाणा और देश का नाम रोशन किया है। इनमें योगेश कथुनिया, नितेश कुमार, हरविंदर सिंह, अरुणा और तरुण जैसे खिलाड़ी शामिल होंगे। यह भाग हरियाणा के खेल प्रतिभा को सम्मानित करते हुए राज्य के खेलों में योगदान को दर्शाएगा।
हरियाणा की झांकियां हर साल अपनी अनूठी थीम के लिए जानी जाती हैं। 2022 में “खेल में नंबर वन” थीम के तहत खेल उपलब्धियों को प्रमुखता दी गई थी। 2023 में “गीता महोत्सव” और 2024 में “मेरा परिवार-मेरी पहचान” थीम पर आधारित झांकियां निकाली गईं। 2025 की झांकी में राज्य के समग्र विकास, संस्कृति और खेल प्रतिभा को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा।




