




बाबा संजय हर साल दिसंबर महीने में शाम 5 बजे से 6 बजे तक ठंडे पानी और बर्फ में बैठकर तपस्या करते हैं। उनका कहना है कि इस तपस्या से उन्हें श्री बाला जी महाराज की शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त होता है। बाबा का दावा है कि यह शक्ति उन्हें दूसरों की समस्याओं को हल करने और उनके दुःख-दर्द को हरने में मदद करती है।
बाबा के भक्तों का मानना है कि वे गंभीर बीमारियों से लेकर शादी-ब्याह में आने वाली रुकावटों, नौकरी में समस्याओं, और शराब व नशे की लत छुड़ाने तक के समाधान करते हैं। श्रद्धालु उनके पास आकर झाड़-फूंक और देसी नुस्खों के जरिए इलाज करवाते हैं। बाबा इलाज के बदले कोई पैसा नहीं लेते, बल्कि सूखा नारियल, सरसों के तेल की एक बोतल या हनुमान जी के लिए धूप की डिब्बी मांगते हैं।
बाबा के इलाज से लाभ पाने वाले भक्तों की कहानियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
बता दें कि, बाबा संजय हनुमान जी, भगवान शिव, और शनिदेव की आराधना में लीन रहते हैं। वे लाल कपड़े और हनुमान जी की गदा के साथ दिखाई देते हैं। बाबा के दरबार में मंगलवार और शनिवार को विशेष भजन-कीर्तन होता है।
हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल और दिल्ली सहित कई राज्यों से लोग बाबा के दरबार में आते हैं। श्रद्धालु बाबा को “अंतर्यामी बाबा” कहकर बुलाते हैं और उनके तप और भक्ति से प्रभावित होकर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
बाबा संजय का कहना है, “मुझमें कोई शक्ति नहीं है। यह सब बाला जी महाराज की कृपा और आशीर्वाद है। मेरे तप का उद्देश्य केवल लोगों के कष्ट दूर करना है।” बाबा ने बताया कि उन्होंने 6 दिसंबर से यह तप शुरू किया है और 21 दिनों तक इसे जारी रखेंगे।
बाबा के दावों को लेकर जहां उनके भक्त पूरी तरह विश्वास करते हैं, वहीं कुछ लोग इसे अंधविश्वास और चमत्कारों की आड़ में प्रचार मानते हैं। हालांकि, बाबा का तप और उनके प्रति लोगों की आस्था ने उन्हें सिरसा और आस-पास के इलाकों में खास पहचान दिलाई है।




