




अंबाला में आज सुबह 6:00 बजे के बाद अचानक घना कोहरा छा गया। खुले क्षेत्रों में कोहरे की इतनी अधिक परत थी कि विजिबिलिटी बेहद कम हो गई। इस कोहरे के साथ ठंड ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। शहर के लोग, जो सुबह के समय अपने काम पर निकले थे, उन्होंने खुले इलाकों में कोहरे का गहरा असर महसूस किया।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के मुताबिक, अंबाला का स्तर 117 पर पहुंच चुका है, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। हालांकि, ठंड और कोहरे का यह मिलाजुला असर श्वसन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे मौसम में बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
दूसरी ओर, गुरुग्राम में प्रदूषण की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। शहर का AQI 400 के पार पहुंच चुका है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इस बढ़ते प्रदूषण के कारण शहर की प्रमुख इमारतें, जैसे ट्रंप टावर, भी धुंध में छिपी हुई नजर आ रही हैं।
गुरुग्राम में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत कई गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है, जिसमें निर्माण कार्य और बाहरी वाहन चलाने पर सख्त पाबंदियां शामिल हैं। बढ़ते प्रदूषण ने न केवल स्वास्थ्य बल्कि शहर के सामान्य जीवन को भी प्रभावित किया है।
अंबाला और गुरुग्राम, दोनों ही शहर अलग-अलग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अंबाला में ठंड और कोहरे से होने वाली बीमारियों की आशंका है, जबकि गुरुग्राम में प्रदूषण के कारण सांस और हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
इन समस्याओं से निपटने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे। जहां अंबाला में ठंड से बचाव के लिए लोगों को गर्म कपड़े पहनने और घर के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है, वहीं गुरुग्राम में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक ईंधन और वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी है।




