




जानकारी के अनुसार, हरियाणा और इसके आस-पास के क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। इस साल दिसंबर के पहले हफ्ते में बारिश की संभावना काफी कम है, जिससे शुष्कता और बढ़ सकती है। पिछले साल के मुकाबले पहाड़ों पर हल्की बर्फबारी कम हुई है, जिसका सीधा असर हरियाणा के मौसम पर पड़ा है।
प्रदेशवासियों को अभी कड़ाके की ठंड का सामना नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं, लेकिन इन विक्षोभों के बीच का अंतराल अभी छोटा है। जैसे-जैसे यह अंतराल बढ़ेगा, ठंड की तीव्रता बढ़ेगी और ठंडी हवाएं अपना असर दिखाना शुरू करेंगी। हालांकि, इस दौरान तापमान में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी और ठंडी हवाएं पूरे प्रदेश में चलने लगेंगी।
दिसंबर के पहले हफ्ते में प्रदेश में तीन से चार दिन पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहेंगे, जिनसे ठंड में थोड़ी वृद्धि देखने को मिलेगी। हालांकि, इस दौरान तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। दूसरे सप्ताह के बाद, जब पश्चिमी विक्षोभों का असर बढ़ेगा, तो ठंड में और अधिक तीव्रता से आ सकती है। इसके साथ ही ठंडी हवाएं भी चलने लगेंगी, जो ठंड का एहसास बढ़ाएंगी।
हरियाणा के लिए यह मौसम परिवर्तन चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि शुष्कता और बढ़ती ठंड से कृषि, जलवायु और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रदेशवासियों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है, ताकि वे इन परिवर्तनों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।




